Friday, January 23, 2009

कभी तो मरी वफ़ाओं का तुम यक़ीन करो, कहीं न उम्र गुज़र जाए आज़माने में !!!


तुम पे अब खुद को वारता है कोई
तेरी नज़रें उतारता है कोई

जब तू पलकों को बंद करती है
छुपके तुझको निहारता है कोई

रफ़्ता रफ़्ता असर भी होता है
तुझको दिल में उतारता है कोई

दिल की धड़कन को सुन के देख ज़रा
तुझको दिल से पुकारता है कोई

अपनी आगोश में लिटा के तुझे
तेरी ज़ुल्फ़ें संवारता है कोई

तूने महूसस तो किया होगा
तुझको सदियों से चाहता है कोई
मसरूर अब्बास

Tuesday, January 13, 2009

मुंह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन...!!!




दिल का अहवाल मैं लफ़्ज़ों में सुनाऊं कैसे
कल मेरे दिल पे जो गुज़री वो बताऊं कैसे

उंगलियां उनकी मेरे होटों से टकराई थीं
हाल दिल का जो हुआ उसको दिखाऊं कैसे

यूं तो बन जाता है बिगड़ा सा मुक़द्दर लेकिन
बात बिगड़ी है कुछ ऐसी के बनाऊं कैसे

उनको पाऊं तो मरूं और गवाऊं तो मरूं
ऐसी मुश्किल में उन्हें अपना बनाऊं कैसे

महफिलों में मुझे मिलने का कोई शौक नहीं
और तन्हाई में उनको मैं बुलाऊं कैसे

इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते यारों
मैं परेशान हूं चाहत को छुपाऊं कैसे

प्यार करने के भी आदाब हुआ करते हैं
नूर है उसको कलेजे से लगाऊं कैसे

ऐ खुदा तू ही बता दे मुझे अपनी मर्ज़ी
जिसको पाया ही नहीं उसको गंवाऊं कैसे


मसरूर अब्बास

Saturday, January 3, 2009

जानम समझा करो...!!!


आज रूठे हो कल मनाओगे
कब तलक हमपे ज़ुल्म ढ़ाओगे

चांदनी रात ढ़ल गई आखिर
मेरे नज़दीक तुम कब आओगे

गुस्सा है आपका हसीन मगर
बिजलियां कब तलक गिराओगे

चुपके देखा किये हैं हम बरसों
फासले किस घड़ी मिटाओगे

आज ज़िंदा हूं तब भी मरता हूं
मर के भी तुम ही याद आओगे

हसरतें हर घड़ी ये पूछती हैं
तुम मुझे पास कब बुलाओगे

जब भी चाहत का नाम आएगा
मेरे होटों पे तुम ही आओगे

आज मेरी अदा पसंद नहीं
कल मेरे गीत गुनगुनाओगे

मैं हूं तेरा ‘नशा’ तू मेरी ग़ज़ल
बात समझोगे, मुस्कुराओगे !

मसरूर अब्बास

Friday, January 2, 2009

ढ़ाई अक्षर प्रेम के....!!!


दुनिया वाले प्यार की बातें करते हैं
सब साले बेकार की बातें करते हैं

लैला-मजनू ने बस एक पटाई थी
फिर क्यों ये दो-चार की बातें करते हैं

ढ़ाई अक्षर प्रेम इन्हें मालूम नहीं
काहें फिर इज़हार की बातें करते हैं

उनकी दो आंखों में मेरी दुनिया है
ये तो बस संसार की बातें करते हैं

सरगम के सातों सुर हैं बेहाल मगर
पायल की झनकार की बातें करते हैं

सूई में धागा मुश्किल से पड़ता है
हाथों में तलवार की बातें करते हैं

मसरूर अब्बास