Friday, January 2, 2009

ढ़ाई अक्षर प्रेम के....!!!


दुनिया वाले प्यार की बातें करते हैं
सब साले बेकार की बातें करते हैं

लैला-मजनू ने बस एक पटाई थी
फिर क्यों ये दो-चार की बातें करते हैं

ढ़ाई अक्षर प्रेम इन्हें मालूम नहीं
काहें फिर इज़हार की बातें करते हैं

उनकी दो आंखों में मेरी दुनिया है
ये तो बस संसार की बातें करते हैं

सरगम के सातों सुर हैं बेहाल मगर
पायल की झनकार की बातें करते हैं

सूई में धागा मुश्किल से पड़ता है
हाथों में तलवार की बातें करते हैं

मसरूर अब्बास

1 comment:

Unknown said...

Very good rhyming and comparison......!!!!!!!!!

Last two was terrific...
No body can resist their self from laughing like maniac.